Praise God. God led me to draft the lines of this song when He helped me by His grace and healing power to recover from severe Dengue fever, by which I suffered from September 4 to September 15, 2010.
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दी चंगाई, रिहाई,
प्रभु तूने मुझको
दी आशीष की बहुताई,
प्रभु तूने मुझको (2)
टूटा था मन और कमज़ोर तन
तूने रूह से भरा,
अपनी शक्ति मुझको दी (2)
दी चंगाई, रिहाई,
प्रभु तूने मुझको
दी आशीष की बहुताई,
प्रभु तूने मुझको (2)
नीतिसूर्य तू आया मेरे पास
तेरे किरणों ने दी
मुझे जीने की आस (2)
दी चंगाई, रिहाई,
प्रभु तूने मुझको
दी आशीष की बहुताई,
प्रभु तूने मुझको (2)
मैं हर पल करता रहा प्रार्थना
तूने विनती सुनी
और उत्तर भी दिया (2)
दी चंगाई, रिहाई,
प्रभु तूने मुझको
दी आशीष की बहुताई,
प्रभु तूने मुझको (2)
देह में मेरे जब एक काँटा रहा
तेरी कृपा काफ़ी थी
मुझ में सामर्थ भी दिखी (2)
दी चंगाई, रिहाई,
प्रभु तूने मुझको
दी आशीष की बहुताई,
प्रभु तूने मुझको (2)
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