Wednesday, February 11, 2026

Main Laut Aaya

Praise God! This song was born out of reflecting on the Parable of the Prodigal Son that Jesus told in Luke 15 - the story of a son who walked away, and a Father who never stopped waiting.

The Prodigal Son is not just about rebellion. It is about remembrance. It is about the moment when a heart, surrounded by emptiness, remembers home. While writing this song, I was reminded that repentance is not humiliation but it is a return. And the Father’s response is not anger but it is embrace. He runs. He calls us by name. He restores identity before we can even finish our apology. If you have ever felt far, ashamed, forgotten, or unsure whether you can come back, this song is for you. The Father’s house is still open. Grace still lifts the fallen. And no matter how far you have wandered, you are one step away from being called “son” or “daughter” again. May this song lead you back not just emotionally, but spiritually into the arms of the Father God. If it blesses you, share it with someone who needs to remember where home is.

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भटका था मैं दूर कहीं

अपने सपनों में खोकर वहीं

पाप का था अँधेरा साया 

पिता का घर जब मैं छोड़ आया

झूठी खुशी, खाली था मन

टूटा हुआ था मेरा जीवन

बदहाली ने जब मुझे घेरा 

याद आया पिता का घर मेरा


मैं लौट आया, मैं लौट आया

पिता ने गले से मुझे लगाया 

दौड़ के आया, प्रेम बरसाया

नाम लेकर उसने मुझे बुलाया

मैं खोया था, पर पाया गया

कृपा से फिर उठाया गया

पिता के घर में आज दोबारा

बेटा कहकर मुझे उसने पुकारा


पापों का बोझ उठाए हुए 

टूटे दिल से पछताए हुए

सोचा था सेवक बन जाऊँ

बस एक कोने में रह जाऊँ

पर प्रेम ने उसके बदल दिया

दोषों को मेरे उसने ढक लिया

अंगूठी, नए वस्त्र और जश्न से

पिता ने मुझे सजाया यत्न से


मैं लौट आया, मैं लौट आया

पिता ने गले से मुझे लगाया 

दौड़ के आया, प्रेम बरसाया

नाम लेकर उसने मुझे बुलाया

मैं खोया था, पर पाया गया

कृपा से फिर उठाया गया

पिता के घर में आज दोबारा

बेटा कहकर मुझे उसने पुकारा

खाली हाथ मैं आया था

टूटे दिल को लाया था

पर पिता नज़रों ने तेरे

कदमों को स्थिर किया मेरे

तेरी बाँहों में जब मैं आया 

अगम शांति को मैंने है पाया 

तेरे मेज़ पर मुझे जब स्थान मिला

मिट गए सारे शिकवे और गिला


मैं लौट आया, मैं लौट आया

पिता ने गले से मुझे लगाया 

दौड़ के आया, प्रेम बरसाया

नाम लेकर उसने मुझे बुलाया

मैं खोया था, पर पाया गया

कृपा से फिर उठाया गया

पिता के घर में आज दोबारा

बेटा कहकर मुझे उसने पुकारा


दौड़ते हुए तू आता है

गले से मुझे लगाता है

मेरी कहानी बदल के तू

नई शुरुआत कराता है 

न दंड दिया, न ठुकराया

बस प्रेम से मुझे अपनाया

हे पिता तू है मेरी पहचान

तेरे बिना मैं हूँ एक अनजान


मैं लौट आया, मैं लौट आया

पिता ने गले से मुझे लगाया 

दौड़ के आया, प्रेम बरसाया

नाम लेकर उसने मुझे बुलाया

मैं खोया था, पर पाया गया

कृपा से फिर उठाया गया

पिता के घर में आज दोबारा

बेटा कहकर मुझे उसने पुकारा


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